
लखनऊ: वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इस एआई प्लेटफॉर्म का उपयोग कैंसर, मधुमेह, संक्रमण और अन्य जटिल बीमारियों के लिए पौध-आधारित नई एवं सटीक आयुर्वेदिक दवाओं की खोज में किया जा सकेगा
जंगलों, खेतों और बगीचों में मिलने वाले औषधीय पौधों व जड़ी बूटियों में मौजूद कौन-सा रासायनिक यौगिक भविष्य की असरदार दवा बन सकता है, इसका पता लगाने के लिए अब वैज्ञानिकों को महीनों तक प्रयोगशालाओं में परीक्षण नहीं करने पड़ेंगे।
लखनऊ स्थित केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित नया स्वदेशी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर पर ही हजारों पौध-आधारित यौगिकों की जांच कर उनकी दवा बनने की क्षमता, सुरक्षा और संभावित दुष्प्रभाव का प्रारंभिक आकलन कर देगा।
इससे वैज्ञानिक सीधे सबसे बेहतर यौगिकों पर शोध शुरू कर सकेंगे। नई दवाओं की खोज पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और कम खर्च में होगी। संस्थान को इस प्लेटफॉर्म का कॉपीराइट भी मिल गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इस एआई प्लेटफॉर्म का उपयोग कैंसर, मधुमेह, संक्रमण और अन्य जटिल बीमारियों के लिए पौध-आधारित नई एवं सटीक आयुर्वेदिक दवाओं की खोज में किया जा सकेगा
यौगिकों की डिजिटल स्क्रीनिंग करेंगे 20 एआई टूल
सीमैप के वैज्ञानिकों की ओर से विकसित इस प्लेटफॉर्म में 20 एआई आधारित सॉफ्टवेयर टूल्स शामिल हैं। यह किसी पौधे से प्राप्त यौगिक की रासायनिक संरचना और उसके गुणों का विश्लेषण करता है।
सॉफ्टवेयर टूल यह अनुमान लगाता है कि वह यौगिक किस बीमारी के इलाज में उपयोगी हो सकता है। शरीर में उसका व्यवहार कैसा रहेगा। उसमें विषाक्तता का खतरा कितना है और उससे दवा बनने की कितनी संभावना है।
इस पूरी प्रक्रिया में हजारों यौगिकों की डिजिटल स्क्रीनिंग यानी छंटनी कर सबसे संभावनाशील यौगिकों की सूची तैयार की जाती है। इन पर बाद में प्रयोगशाला में विस्तृत परीक्षण किए जाते हैं।
तेज शोध और सटीक नतीजे
सीमैप के निदेशक प्रो. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि पहले शुरुआती चरण की जांच में महीनों लग जाते थे। अब यही काम कुछ घंटों या दिनों में पूरा किया जा सकेगा। इससे कम उपयोगी यौगिकों पर महंगे प्रयोग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शोध का समय और लागत दोनों घटेंगे। नई दवाओं के विकास की रफ्तार बढ़ेगी।
हर्बल दवाओं को मिलेगा वैज्ञानिक आधार: एआई प्लेटफॉर्म के विकास का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक अमन कौशिक ने बताया कि यह तकनीक आयुर्वेद और पारंपरिक औषधीय पौधों के वैज्ञानिक प्रमाण जुटाने में भी मदद करेगी।
जानिए सीमैप के बारे में: केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) लखनऊ में वर्ष 1959 में स्थापित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशाला है। यह संस्थान मुख्य रूप से औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती, विकास और उनसे हर्बल उत्पाद बनाने की तकनीक विकसित करने पर कार्य करता है।



