
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026′ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को लगाया था जिसकी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। आपको बता दें कि यूजीसी ने नए नियम के खिलाफ देशभर में व्यापक प्रदर्शन हो रहे थे।
इसी नियम के लिए खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिसकी सुनवाई आज 29 जनवरी को की जा रही है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी।
इन नियमों पर हो रहा था बवाल
यूजीसी की ओर से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026′ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) लाया गया है। इसके 4 बिंदु निम्नलिखित हैं-
हर यूनिवर्सिटी/ कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads का होगा गठन
देशभर के हर यूनिवर्सिटी/ कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads का गठन किया जायेगा। इसके विरोध में तर्क दिया गया है कि इसमें Equity Squads को अधिक अधिकार प्रदान किये गए हैं और इसमें भेदभाव की परिभाषा भी स्पष्ट नहीं हैं।
24×7 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली
इस नियम के तहत हर संस्थान में Equal Opportunity Centre स्थापित किया जायेगा जहां स्टूडेंट्स अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके विरोध में तर्क दिया गया है कि इस नियम भी सवर्ण छात्रों के लिए ठीक नहीं है। इसमें बिना किसी भी सबूत के कोई भी शिकायत दर्ज कर देगा जिस दूसरे स्टूडेंट्स का करियर प्रभावित होगा।
एससी- एसटी पर दिया गया ध्यान
इस नए नियम का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ी जातियों को संस्थान में सुरक्षित माहौल प्रदान किया जाना है जिससे कि वे भेदभाव का शिकार न हों। इसको लेकर आंदोलनकारियों का कहना है कि इससे सवर्ण वर्ग के छात्रों को सीधे टारगेट किया जायेगा जो और भी ज्यादा भेदभाव बढ़ाने का काम करेगा।



