दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप, लेकिन एक भी सड़क नहीं? Greenland से जुड़े 10 फैक्ट्स कर देंगे आपको हैरान

अमेरिकी राजनीति में जब से ग्रीनलैंड को खरीदने की बात उठी है, तभी से इस विशाल आर्कटिक द्वीप को लेकर दुनियाभर में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अगर आप इसे राजनीति से परे देखें, तो पाएंगे कि दुनिया के सबसे बड़े द्वीप के रूप में अपनी पहचान रखने वाला ग्रीनलैंड, ग्लेशियर्स और कड़ाके की ठंड से कहीं बढ़कर है। आइए, जानते हैं इससे जुड़े 10 दिलचस्प फैक्ट्स।

कुछ समय पहले पूरी दुनिया की नजरें अचानक ग्रीनलैंड पर टिक गईं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क से इस क्षेत्र को खरीदने की इच्छा जताई। इन सनसनीखेज सुर्खियों ने सबको चौंका दिया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ग्रीनलैंड सिर्फ एक ‘रियल एस्टेट’ का सौदा या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक अनसुलझी पहेली जैसा है।

जी हां, अक्सर लोग इसे सिर्फ जमा देने वाली ठंड के नजरिए से देखते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यहां का समृद्ध इतिहास और आधुनिक पहचान इसे कई मायनों से खास बनाती है। आइए, इस आर्टिकल में ऐसे 10 फैक्ट्स (Surprising Facts About Greenland) के बारे में जानते हैं।


दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है (महाद्वीप नहीं)। इसका कुल क्षेत्रफल 2.16 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। इसका लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बर्फ की चादर से ढका हुआ है। जो हिस्सा बर्फ से मुक्त है, वह स्वीडन के आकार के बराबर है। साल 2017 के अनुमान के अनुसार, यहां की आबादी केवल 56,480 है, जो इसे दुनिया के सबसे कम घनी आबादी वाले देशों में से एक बनाता है।

स्वतंत्र देश
ग्रीनलैंड ‘किंगडम ऑफ डेनमार्क’ के भीतर एक स्वतंत्र देश है। भौगोलिक रूप से यह उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है, लेकिन पिछले 1,000 वर्षों से यह राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से यूरोप से जुड़ा हुआ है। 1953 में इसे डेनमार्क का हिस्सा बनाया गया था। 1979 में इसे ‘होम रूल’ मिला और 2009 में ‘सेल्फ रूल’ की शुरुआत हुई, जिससे ग्रीनलैंड की सरकार को अधिक निर्णय लेने की शक्ति मिली।

‘एस्किमो’ नहीं, ‘इनुइट’ कहें
ग्रीनलैंड की 88% आबादी इनुइट (Inuit) या डेनिश-इनुइट मिश्रित है। यहां के लोग खुद को ‘एस्किमो’ कहलाना पसंद नहीं करते। उनके लिए सही नाम ‘इनुइट’ या ‘कलाल्लीत’ (Kalaallit) है, जिसका मूल भाषा में अर्थ होता है- ‘ग्रीनलैंडर’। यहां के लोग कनाडा और अलास्का के इनुइट लोगों के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं।

नहीं है एक भी सड़क
यह जानकर आपको हैरानी होगी कि 2.16 मिलियन वर्ग किलोमीटर का विशाल देश होने के बावजूद, यहां एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ने वाली कोई सड़क या रेलवे लाइन नहीं है। शहर के भीतर सड़कें हैं, लेकिन वे शहर के बाहर खत्म हो जाती हैं। लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए प्लेन, नाव, हेलीकॉप्टर, स्नोमोबाइल या कुत्तों द्वारा खींची जाने वाली स्लेज का इस्तेमाल करते हैं।

बहुभाषी देश
ग्रीनलैंड के ज्यादातर लोग ग्रीनलैंडिक और डेनिश दोनों भाषाएं बोलते हैं। आज की युवा पीढ़ी स्कूल में इन दोनों भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी भी सीख रही है। बता दें, कयाक (Kayak) और इग्लू (Igloo) जैसे शब्द मूल रूप से ग्रीनलैंडिक शब्द हैं, जिन्हें दुनिया भर की भाषाओं ने अपनाया है।

एक ही शहर में देश की एक-चौथाई आबादी
देश की लगभग एक-चौथाई आबादी राजधानी ‘नूक’ में रहती है। यह शहर ग्रीनलैंड का सबसे बड़ा और आधुनिक शहर है। अपने छोटे आकार के बावजूद, यहां कई म्यूजियम, कैफे और फैशन बुटीक हैं। पहाड़ों और विशाल फ्योर्ड प्रणाली के मुहाने पर बसा यह शहर प्रकृति और आधुनिकता का अद्भुत संगम है।

देखने को मिलता है मिडनाइट सन
यहां हर साल 25 मई से 25 जुलाई तक सूरज नहीं डूबता है। इस दौरान दिन और रात दोनों समय सूरज दिखाई देता है। इसे ‘मिडनाइट सन’ कहा जाता है। 21 जून को यहां साल का सबसे लंबा दिन होता है और यह एक राष्ट्रीय अवकाश भी है। लोग इस दिन धूप सेंकने और प्रकृति के बीच बारबेक्यू का आनंद लेने के लिए बाहर निकलते हैं।

व्हेल और मछली पालन
मछली पकड़ना यहां का एक प्रमुख उद्योग है। ग्रीनलैंड लगभग हर चीज का आयात करता है, सिवाय मछली, सीफूड, और व्हेल या सील जैसे जानवरों के, जिनका शिकार यहां किया जाता है। यहां ‘ओवरफिशिंग’ को रोकने के लिए कोटा निर्धारित है। ब्लू व्हेल जैसी प्रजातियां संरक्षित हैं और उनका शिकार मना है। व्हेल और सील के मीट का एक्सपोर्ट नहीं किया जाता, यह केवल स्थानीय खपत के लिए होता है।

एक समय हरा-भरा था ग्रीनलैंड
आपको मन में भी सवाल उठता होगा कि ज्यादातर हिस्सा बर्फ से ढके होने के बावजूद इसका नाम ‘ग्रीनलैंड’ क्यों पड़ा? दरअसल, यह नाम ‘एरिक द रेड’ नामक एक निर्वासित व्यक्ति ने दिया था, ताकि लोग इस नाम से आकर्षित होकर यहां बसने आएं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार, 2.5 मिलियन साल पहले ग्रीनलैंड वास्तव में काफी हरा-भरा था। बर्फ के नीचे जमी प्राचीन मिट्टी के अध्ययन से यह खुलासा हुआ है।

हजारों साल पुराना इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, ग्रीनलैंड में पहले इंसान लगभग 2500 ईसा पूर्व आए थे। वर्तमान इनुइट आबादी के पूर्वज 13वीं शताब्दी में एशिया से यहां आए थे। वहीं, नॉर्समेन 10वीं शताब्दी में यहां बसे लेकिन 15वीं शताब्दी में गायब हो गए। आज के ग्रीनलैंडर उन इनुइट्स के वंशज हैं जो सदियों पुरानी परंपराओं का पालन आज भी करते हैं।

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