भारतीय ईंधन टैंकरों की ढाल बनी नौसेना

 भारतीय नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के बीच भारतीय ईंधन और एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात किए हैं।

टीआईओ की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना ने आधे दर्जन से अधिक युद्धपोतों को, जिनमें रसद जहाज भी शामिल हैं, एहतियाती तौर पर इस क्षेत्र में भेजा है।

ये युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में ही तैनात रहेंगे और संवेदनशील जलमार्ग में प्रवेश नहीं करेंगे। उनकी मुख्य भूमिका भारतीय जहाजों को उत्तरी अरब सागर के सुरक्षित जलक्षेत्र तक पहुंचाना होगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान होर्मुज से अधिक ईंधन टैंकरों को निकलने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव के कारण जोखिम बरकरार है।

हाल के दिनों में भारत ने पहले ही दो सरकारी स्वामित्व वाले एलपीजी टैंकरों—शिवालिक और नंदा देवी—के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया है, जो सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। नई दिल्ली तेहरान के साथ बातचीत जारी रखे हुए है ताकि अधिक जहाजों की आवाजाही सुगम हो सके।

फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हवाई हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक यातायात लगभग ठप हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर है, विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। देश के एलपीजी आयात का लगभग 90% मध्य पूर्व से आता है, और कुल तेल आयात का करीब 40-50% इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है।

भारतीय नौसेना की यह तैनाती ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत चल रही है, जो 2019 से खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में कई भारतीय जहाज—जिनमें 22 से अधिक भारत-बाउंड वेसल शामिल हैं—क्षेत्र में फंसे हुए हैं या सुरक्षित निकासी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नौसेना के युद्धपोत इनकी निगरानी और एस्कॉर्ट कर रहे हैं।

भारत ने अमेरिका के आह्वान पर होर्मुज की सुरक्षा में सीधे सहयोग देने से इनकार किया है और कहा है कि इस मुद्दे पर वाशिंगटन के साथ कोई द्विपक्षीय चर्चा नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत कई हितधारकों के साथ परामर्श जारी रखेगा।

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