यूपी में बन रहा है देश का सबसे लंबा डिफेंस कॉरिडोर

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश तेजी से राष्ट्रीय नक्शे पर मजबूत पहचान बना रहा है। बड़ी कंपनियों की लगातार दिलचस्पी और हजारों करोड़ के निवेश प्रस्तावों के बीच यूपी में 325 किलोमीटर लंबा डिफेंस काॅरिडोर सर्किट आकार ले चुका है।

झांसी, कानपुर और लखनऊ के बाद अब उन्नाव को सातवें नोड के रूप में शामिल कर लिया गया है, जहां करीब 4,000 करोड़ रुपये के निवेश की शुरुआत हो चुकी है। चार प्रमुख जिलों को जोड़ने वाला यह डिफेंस काॅरिडोर देश का सबसे लंबा और रणनीतिक रक्षा औद्योगिक क्लस्टर बनने की ओर बढ़ रहा है।

उत्तर प्रदेश को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पहले से मौजूद छह डिफेंस नोड्स में आगरा और अलीगढ़ के साथ झांसी, कानपुर और लखनऊ शामिल थे। अब उन्नाव को नए डिफेंस काॅरिडोर के रूप में विकसित कर पूरे नेटवर्क को एक सर्किट के रूप में जोड़ा जा रहा है। इस विस्तार के साथ ही यूपी का डिफेंस काॅरिडोर सर्किट लगभग 325 किलोमीटर में फैल गया है।

उन्नाव में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को 230 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया जा रहा है। सराय कटियान, मुर्तजा नगर और ओरहर क्षेत्र में बनने वाली इस परियोजना से हथियार, गोला-बारूद, ड्रोन, मशीन गन, बुलेट और बुलेटप्रूफ जैकेट जैसे रक्षा उपकरणों के निर्माण का रास्ता खुलेगा। शासन के मुताबिक, इस एक नोड से ही करीब 15 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

रणनीतिक दृष्टि से भी उन्नाव का चयन अहम माना जा रहा है। यह क्षेत्र कानपुर-लखनऊ हाईवे से महज दो किलोमीटर, निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे से 100 मीटर और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते यहां से तैयार होने वाले रक्षा उत्पादों की देशभर में आसान आपूर्ति संभव होगी।

62 से ज्यादा कंपनियों को भूमि आवंटन
झांसी, कानपुर, लखनऊ और अब उन्नाव को मिलाकर बने इस डिफेंस काॅरिडोर में 40 से अधिक छोटी-बड़ी कंपनियां निवेश प्रक्रिया में शामिल हो चुकी हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डिफेंस कॉरिडोर के तहत अब तक कुल 62 से ज्यादा कंपनियों को भूमि आवंटन किया जा चुका है, जिनमें से बड़ी हिस्सेदारी इन्हीं चार जिलों की है।

झांसी नोड में 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव
झांसी नोड इस समय निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां करीब 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आ चुके हैं। गुडलक एस्ट्रा, रेडवुड ह्यूजेस, सिटाडेल और गुरुत्वा जैसी कंपनियां भारी उद्योग और रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना कर रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि झांसी में बड़े भूखंड उपलब्ध होने के कारण यहां बड़े स्तर की फैक्ट्रियों को तेजी से मंजूरी मिल रही है।

कानपुर और लखनऊ नोड करोड़ाें का निवेश
कानपुर नोड को गोला-बारूद और अंतरिक्ष उपकरण निर्माण के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। अदाणी डिफेंस द्वारा करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत से गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है, जबकि अन्य कंपनियां आर्टिलरी शेल और सैटेलाइट उपकरण निर्माण में निवेश कर रही हैं। लखनऊ नोड में ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के साथ उन्नत धातु और रक्षा तकनीक से जुड़ी इकाइयां स्थापित की गई हैं। यहां करीब 4,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतर चुके हैं।

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