
प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ (Sunderkand Path Benefits) करना विशेष लाभकारी माना गया है। इससे प्रभु राम के प्रति भक्ति बढ़ती है और साधक को काम, क्रोध, लोभ जैसी बुराइयों से मुक्ति मिलती है। शनिवार के दिन सुंदरकांड की इन विशेष चौपाइयों और दोहे का पाठ अर्थ सहित जरूर करें।
रामचंद्र गुन बरनैं लागा। सुनतहिं सीता कर दुख भागा॥
लागीं सुनैं श्रवन मन लाई। आदिहु तें सब कथा सुनाई॥
भावार्थ: जब हनुमान जी ने माता सीता के समक्ष प्रभु श्री राम के दिव्य गुणों और उनकी महिमा का वर्णन किया, तो इसे सुनते ही माता सीता के सारे दुख ओझल हो गए। उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ हनुमान जी द्वारा सुनाई गई रामकथा सुनी। यह चौपाई हमें सिख देती है कि जब जीवन में निराशा हमें घेर ले, तो परमात्मा के गुणों का स्मरण और सत्संग करने से हमें मानसिक तनाव और शोक से मिल सकती है।
हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम॥
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां बिश्राम॥
भावार्थ: जब हनुमान जी को समुद्र लांघते समय मैनाक पर्वत विश्राम करने के लिए कहता है, तब वह केवल उसे हाथ से छूकर सादर प्रणाम करते हैं और स्पष्ट कहते हैं कि “जब तक प्रभु श्री राम का कार्य पूरा न हो जाए, तब तक मेरे जीवन में विश्राम का कोई स्थान नहीं है।” यह दोहा हमें कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन का पाठ पढ़ाता है। अगर हम जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो लक्ष्य प्राप्ति से पहले हमें आलस्य और विश्राम का त्याग कर देना चाहिए।
काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ।
सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत॥
भावार्थ: इस दोहे में कहा गया है कि काम, क्रोध, अहंकार और लोभ ये चारों विकार व्यक्ति के लिए साक्षात नरक के द्वार हैं। बुद्धिमान व्यक्ति वही है, जो इन बुराइयों का त्याग करे और भगवान श्री राम की शरण में जाए, क्योंकि संत और ज्ञानी पुरुष भी इसी मार्ग का अनुसरण करते हैं।
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
भावार्थ: इस चौपाई में उस प्रसंग का वर्णन किया गया है जब लंका की द्वारपालिका लंकिनी हनुमान जी से कहती है कि “अयोध्या नरेश श्री राम को अपने हृदय में धारण करके आप नगर में प्रवेश करें और अपने सभी कार्यों को सिद्ध करें।” जो भक्त हृदय में राम जी को रखकर कार्य करता है, उसके लिए जहर भी अमृत बन जाता है और शत्रु मित्र बन जाते हैं।
समुद्र गाय के खुर के समान छोटा हो जाता है और दहकती अग्नि में भी शीतलता का अनुभव होता है। ऐसे में यह चौपाई आत्मविश्वास, ईश्वर पर भरोसा और कठिन समय में निर्भय होकर कार्य करने की प्रेरणा देती है।



