
बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 19 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनके संचालन के लिए 171 नए अराजपत्रित पद भी सृजित किए जाएंगे।
न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। पश्चिम चंपारण (बेतिया), मधुबनी, भोजपुर (आरा), सिवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर (भभुआ), कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद तथा लखीसराय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अंतर्गत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 19 अतिरिक्त अनन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना को स्वीकृति दी गई है।
इन न्यायालयों के सुचारु संचालन के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालयों में अराजपत्रित श्रेणी के कुल 171 पदों के सृजन की भी मंजूरी प्रदान की गई है। यह निर्णय न्याय तक शीघ्र पहुंच, पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा तथा संवेदनशील एवं जवाबदेह न्यायिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
19 जिलों में स्थापित होंगे नए विशेष न्यायालय
स्वीकृति के अनुसार पश्चिम चंपारण (बेतिया), मधुबनी, भोजपुर (आरा), सिवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर (भभुआ), कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद तथा लखीसराय में नए अनन्य विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इन अदालतों का उद्देश्य एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के लंबित मामलों का त्वरित और प्रभावी निपटारा सुनिश्चित करना है।
171 नए पदों के सृजन को भी मिली मंजूरी
इन विशेष न्यायालयों के संचालन के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालयों में अराजपत्रित श्रेणी के कुल 171 नए पद सृजित किए जाएंगे। इससे न्यायालयों के प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और मामलों की सुनवाई अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने पर जोर
सरकार का मानना है कि नए विशेष न्यायालयों और अतिरिक्त मानव संसाधन की उपलब्धता से एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी। साथ ही पीड़ितों को समयबद्ध न्याय मिलने के साथ न्यायिक व्यवस्था अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।



