
आजकल लोग ट्रिप पर जाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह परेशानी का कारण बन सकता है। एआई गलत जानकारी दे सकता है, जिसके कारण आपकी ट्रिप का मजा किरकिरा हो सकता है। इसलिए एआई से ट्रिप प्लान करने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन इसके साथ कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी है।
आज के दौर में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हम कई कामों के लिए कर रहे हैं। एक छोटा-सा ईमेल लिखवाने से लेकर करियर एडवाइस तक, हम हर काम में एआई की मदद ले रहे हैं। ऐसे में कई लोग तो अपने घूमने की प्लानिंग भी एआई से ही करवा रहे हैं।
यह हमारा पर्सनल ट्रैवल एजेंट बन गया है। कुछ ही सेकंड्स में यह आपको पूरे हफ्ते का इटिनररी बनाकर दे देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस AI पर आप इतना भरोसा कर रहे हैं, वह आपके वेकेशन को एक बुरे सपने में भी बदल सकता है? आइए जानते हैं एआई से ट्रिप प्लान करना आपको कैसे मुसीबत में डाल सकता है और उन स्थितियों से बचने के तरीके क्या हैं।
AI आपको परेशानी में कैसे डाल सकता है?
हैलुसिनेशन और गलत जानकारी- एआई मॉडल्स कभी-कभी ऐसी जानकारी बना लेते हैं जो हकीकत में होती ही नहीं। इसे तकनीकी भाषा में हैलुसिनेशन कहते हैं। हो सकता है एआई आपको किसी ऐसे रेस्टोरेंट या म्यूजियम में भेज दे जो 5 साल पहले बंद हो चुका हो, या किसी ऐसे होटल का सुझाव दे, जो असल में है ही नहीं।
रियल टाइम अपडेट का अभाव- ज्यादातर एआई टूल्स एक निश्चित समय तक के डाटा पर ट्रेंड होते हैं। वे आपको यह नहीं बता पाएंगे कि जिस सड़क से आप जाने वाले हैं वहां आज लैंडस्लाइड हुआ है या जिस शहर में आप जा रहे हैं वहां कोई हड़ताल या किसी दूसरी वजह से रास्ते बंद हैं।
लॉजिस्टिक्स की समझ न होना- एआई आपको सुबह 9 बजे एक पहाड़ की चोटी पर होने और 10 बजे समुद्र के किनारे पहुंचने का प्लान दे सकता है। उसे स्थानीय ट्रैफिक, संकरी सड़कों या चढ़ाई में लगने वाले वास्तविक समय का अंदाजा नहीं होता। यह कागजी प्लान जमीनी हकीकत से कोसों दूर हो सकता है।
सांस्कृतिक बारीकियों की कमी- एआई को यह नहीं पता होता कि किसी खास दिन किसी धार्मिक स्थल पर जाने के लिए खास ड्रेस कोड है या वहां केवल स्थानीय लोगों को ही एंट्री मिलती है। ऐसी जानकारी की कमी में आप खुद को असहज स्थिति में पा सकते हैं।
इन परेशानियों से बचने के लिए क्या करें?
ट्रिप को सुरक्षित और मजेदार बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल एक गाइड की तरह करें, न कि बॉस की तरह।
ट्रिपल चेकिंग की आदत डालें- AI ने जो भी होटल, फ्लाइट या जगह सुझाई है, उसे गूगल मैप्स या ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर क्रॉस-चेक जरूर करें। देखें कि क्या वह जगह अभी भी खुली है और उसके हालिया रिव्यूज कैसे हैं।
ऐप्स और वेबसाइट्स का इस्तेमाल करें- परिवहन और मौसम की सटीक जानकारी के लिए सरकारी ऐप्स या वेबसाइट्स का सहारा लें। जैसे- अगर आप स्विट्जरलैंड जा रहे हैं, तो केवल एआई पर भरोसा न करें, सही टाइमिंग के लिए वहां के रेल ऐप को चेक करें।
बफर टाइम रखें- एआई के बताए गए समय में हमेशा कुछ एक्स्ट्रा समय जोड़कर चलें। अगर एआई कहता है कि सफर 2 घंटे का है, तो मान कर चलें कि इसमें 3 घंटे लगेंगे। इससे आप हड़बड़ी और तनाव से बचेंगे।
ह्युमन एक्सपीरिएंस पर भरोसा करें- ट्रैवल एप्स या सोशल मीडिया पर जाकर उन लोगों की बातें पढ़ें जो हाल ही में वहां से लौटे हैं। इससे आपको ज्यादा सटीक अंदाजा लग पाएगा कि आपको कितना समय लगेगा और बजट कितना हो सकता है।



