
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय OTT प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाले आपत्तिजनक और अनैतिक कंटेंट को रोकने के लिए एक व्यापक कानूनी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस कानून का उद्देश्य अनुचित सामग्री को रोकना है, लेकिन ऐसा करते समय नागरिकों के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
गृह मामलों की मंत्रालय से जुड़ी स्थायी समिति ने शुक्रवार को संसद में पेश अपनी 259वीं रिपोर्ट में सिफारिश की कि इस नए नियम में मजबूत तकनीक-आधारित आयु सत्यापन, प्रभावी पैरेंटल कंट्रोल और उल्लंघन करने पर सख्त जुर्माने के प्रावधान शामिल होने चाहिए।
254वीं रिपोर्ट में भी दी थी सलाह
OTT प्लेटफॉर्म्स कि मौजूदा व्यवस्था काफी हद तक स्व-नियमन (Self-Regulation) पर निर्भर है, संसदीय समिति ने अपनी 254वीं रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई की सिफारिशों में एक बार फिर स्वतंत्र ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’ गठित करने की सलाह दी है।
समिति ने सुझाव दिया है कि इस पैनल में बाल विकास, शिक्षा, कानून, सामाजिक विज्ञान और नागरिक समाज के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, जो शिकायत दर्ज कराए गए OTT कंटेंट की समीक्षा कर सकें और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा सकें।
OTT प्लेटफॉर्म्स मनोरंजन का प्रमुख जरिया
समिति ने अपनी 254वीं रिपोर्ट में भी सलाह दी थी, “भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स मनोरंजन का प्रमुख जरिया बन चुके हैं। इनकी पहुंच पारंपरिक सिनेमा से भी अधिक हो गई है और इनके दर्शकों में नाबालिगों की संख्या भी बहुत ज्यादा है।”
समिति ने कहा कि फिल्मों के लिए ‘सिनेमैटोग्राफ एक्ट’ के तहत रिलीज से पहले सर्टिफिकेशन अनिवार्य होता है। इसके विपरीत, OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट ‘आईटी नियम, 2021’ के तहत सेल्फ-क्लासिफिकेशन सिस्टम और रिलीज के बाद की शिकायत निवारण व्यवस्था के आधार पर संचालित होता है।
किस वजह से अश्लील कंटेंट के संपर्क में आ रहे बच्चे?
समिति ने सुझाव देते हुए बताया कि इन नियमों में उम्र की रेटिंग, पैरेंटल कंट्रोल और शिकायत निवारण सिस्टम की जरूरत होती है, लेकिन प्री-रिलीज जांच की कमी और उम्र की पुष्टि करने वाले कमजोर सिस्टम के कारण नाबालिग (बच्चे) अभी भी अश्लील कंटेंट के संपर्क में आ जाते हैं।
इसलिए सरकार एक्सपर्ट्स का एक मान्यता प्राप्त पैनल बनाने पर विचार करे जो नई OTT रिलीज की निगरानी करेगा। ताकि, ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’ शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से यूजर्स द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर चिह्नित या ट्रेंडिंग कंटेंट की समीक्षा करे।
कार्रवाई का भी प्रावधान
बयान के अनुसार, यह पैनल देश की सांस्कृतिक मान्यताओं और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उचित नियम व दिशानिर्देश तैयार करेगा। इसके साथ ही, समिति ने यह सिफारिश भी की है कि पैनल इन नियमों या दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर दंड (जुर्माने) का प्रावधान भी तय करे।



