
बांबे हाई कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि क्या राज्य में कोई कानून व्यवस्था है? क्या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इतने बेबस हैं कि वह उस कैबिनेट मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते, जिनका बेटा कई सप्ताह से गिरफ्तारी से बच रहा है?
हाई कोर्ट ने शिवसेना शिंदे गुट के नेता एवं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इस याचिका में पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे और राकांपा नेता श्रीयांश जगताप की अग्रिम जमानत याचिका को चुनौती दी गई है।
विकास गोगावले रायगढ़ जिले के महाड नगर परिषद चुनाव के दौरान हुई हिंसक झड़प में मुख्य आरोपित है। दो दिसंबर को हुए चुनाव के दौरान एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं और क्रास-एफआइआर दर्ज की गई। विकास गोगावले और उनके चचेरे भाई महेश ने गिरफ्तारी से पहले जमानत मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
गुरुवार को जस्टिस माधव जामदार ने मंत्री के बेटे को गिरफ्तार करने में पुलिस की विफलता पर फटकार लगाई। सत्र न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद से वह लापता है। जस्टिस जामदार ने कहा-मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते हैं.. वे अपने माता-पिता के संपर्क में रहते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती?
अदालत की फटकार के बाद सरकार ने आश्वासन दिया कि मंत्री यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका बेटा आत्मसमर्पण कर दे। एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने कहा-गोगावाले अपने बेटे से संपर्क करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वह कल आत्मसमर्पण कर दे।



