चीन ने विदेशी कंपनियों पर कसा शिकंजा

तैयार माल की अधिकता से जूझ रहे चीन ने विदेशी कंपनियों के कामकाज से संबंधित नियम कड़े किए हैं। ऐसा चीन के आधारभूत ढांचे का लाभ लेते हुए विदेशी कंपनियों को उत्पादन करने और तैयार माल को निर्यात करने से रोकने की मंशा है।

नए नियमों में विदेशी कंपनियों को चीनी कंपनियों का स्वरूप देकर कार्य करने और चीन की कंपनियों के साथ गठजोड़ करने के नियम भी कड़े किए गए हैं। इन नए नियमों पर प्रधानमंत्री ली कछियांग ने सात अप्रैल को हस्ताक्षर किए हैं। नए नियम चीन में लागू हो गए हैं। चीन के सामान का सरप्लस स्टाक पूरे विश्व के लिए समस्या बन गया है।

यूक्रेन युद्ध के चलते पहले से धीमी आर्थिक तरक्की की रफ्तार को ईरान युद्ध ने लगभग ठप कर दिया है। ऐसे में विश्व के सबसे बड़े निर्यातक देश चीन के तैयार माल की खपत घटी है और चीन के गोदाम, बंदरगाह और उपभोक्ता देशों के भंडार गृह चीनी माल से भर गए हैं। इससे विश्व स्तर पर चिंता पैदा हो गई है।

विदेशी कंपनियों के लिए चीन के नए नियम इसी समस्या से निपटने के लिए हैं। पिछले वित्त वर्ष में चीन का कुल निर्यात 10 खरब डालर के आंकड़े को पार कर गया था। लेकिन ताजा वर्ष की पहली तिमाही में चीनी माल की बिक्री और खपत धीमी पड़ गई है।

इससे चीनी कारखानों में उत्पादन कम करना पड़ा है और वहां पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी का खतरा पैदा हो गया है। इन स्थितियों से निपटने के लिए चीन ने 18 बिंदुओं वाले नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने वाली विदेशी कंपनियों और उनका सहयोग करने वाली चीनी कंपनियों के लिए कड़े दंड का प्रविधान किया गया है।

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