
राजधानी में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बीते तीन साल बाद जनवरी में अबतक सबसे अधिक मेघ बरसे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इस माह में अब तक 21.01 मिमी बारिश हो चुकी है। इससे पहले 23 और 24 जनवरी की सुबह 8:30 बजे तक सफदरजंग मानक वेधशाला में 19.8 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। वहीं, साल 2025 में 8.3, 2024 में बारिश ट्रेस और 2023 में 20.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके अलावा, ऑल टाइम रिकॉर्ड साल 1885 का है, जब 173.2 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि, मौसम विभाग ने अब महीने के अंत तक बारिश नहीं होने की संभावना जताई है। ऐसे में बुधवार को पारा गिर सकता है। इससे ठिठुरन बढ़ेगी।
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 28 जनवरी से 2 फरवरी तक मौसम ठंडा और बादल वाला रहने का अनुमान है। 28 जनवरी से 30 जनवरी तक अधिकतर बादल छाए रहेंगे और सुबह हल्का कोहरा रहेगा। 29 जनवरी को मौसम आंशिक रूप से बादल वाला रहेगा। 31 जनवरी को भी आंशिक बादल रहने के साथ हल्का कोहरा रहेगा। 1 फरवरी को आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और एक-दो बार हल्की बारिश के साथ गरज और बिजली कड़कने की संभावना है।
दिल्ली में मंगलवार को तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिसके चलते से ठंड बढ़ गई है। बीते सोमवार को अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस रहने के बाद मंगलवार को बारिश से तापमान में गिरावट हुई। इससे एक बार फिर से सर्दी की वापसी हो गई है। मंगलवार को नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिल्ली में फिर मौसम का मिजाज बदल गया। सुबह नौ बजे ही अंधेरा छा गया और रात का अहसास होने लगा। ऐसे में कुछ देर बाद ही बारिश शुरू हो गई। इस दौरान दिल्ली के कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई है, जिससे कड़ाके की ठंड लौट आई। इस दौरान तेज बर्फीली हवाओं ने लोगों को सिहरन महसूस कराई। इससे दृश्यता भी कम रही।
मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मंगलवार को पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई थी। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान अधिकतम तापमान 16.9 रहा। इसमें बीते 24 घंटे में 6.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, न्यूनतम तापमान 8 डिग्री दर्ज हुआ। मौसम विभाग ने दिल्ली के कई इलाकों में शीतलहर की भी घोषणा की।
पश्चिमी विक्षोभ हुआ सक्रिय
मौसम विभाग के अनुसार, रिज में 8.7, आया नगर में 8.2, लोधी रोड में 8.4 और पालम में 9.2 न्यूनतम पारा दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तरी पाकिस्तान और आसपास के इलाकों में सक्रिय है। इस विक्षोभ का असर दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है।



