पानी की कमी से गर्मियों में बढ़ सकती है पेट की गर्मी और गैस!

अगर पेट में लगातार दर्द बना रहता है तो इसे अनदेखा न करें। जल्द से जल्द किसी कुशल चिकित्सक से आपको संपर्क करना चाहिए। गर्मी के दिनों में उच्च तापमान और शरीर में पानी की कमी अर्थात डिहाइड्रेशन के कारण पेट संबंधी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। यही नहीं इन दिनों शरीर से पसीने के रूप में भी काफी मात्रा में पानी निकल जाता है।

पानी की कमी होने पर पेट के अंदर बैड बैक्टीरिया को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। इस कारण पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। शरीर में पानी की कमी के कारण पेट में एसिड की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है। इससे पेट और सीने में जलन होने लगती है। पानी की कमी होने पर कब्ज की समस्या भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही ब्लोटिंग अर्थात पेट फूलने और पेट में गैस बनने की समस्या भी सामने आती है।

खानपान में सतर्कता है जरूरी

गर्मी के दिनों ज्यादा फैट वाले भोजन का प्रयोग करना भी हानिकारक साबित हो सकता है। ज्यादा फैट युक्त भोजन का सेवन करने से अपच संबंधी समस्या सामने आ सकती हैं। इससे पेट में जलन की समस्या भी बढ़ सकती है। गर्मी के दिनों में बहुत से लोग आइसक्रीम और अन्य ठंडे पेय पदार्थों का यह सोचकर सेवन बढ़ा देते हैं कि ये तो ठंडे पदार्थ हैं, लेकिन ठंडे तापमान और शक्कर की अधिक मात्रा का संयोजन पेट संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। यही नहीं जो लोग लैक्टोज या डेयरी उत्पादों के प्रति संवेदनशील हैं, उनके लिए भी ये खाद्य पदार्थ पेट में गैस, ऐंठन और दस्त का कारण बन सकते हैं।

पेट संबंधी समस्याओं से ऐसे होगा बचाव
अगर आपको किडनी संबंधी और पेट संबंधी अन्य कोई समस्या नहीं है तो गर्मी के दिनों में दिनभर में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी अवश्य पिएं।
इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के लिए नींबू की शिकंजी, नारियल पानी या ओआरएस का घोल लें। नारियल पानी पेट के पीएच स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है।
ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करें, जैसे दही, छाछ, रायता, लस्सी। इनसे पेट की गर्मी शांत होती है और पाचनतंत्र सही रहता है।
पेट और पाचनतंत्र को सही रखने के लिए मौसमी फलों का सेवन अवश्य करें, जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी आदि। इनमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाती है।
गर्मी के दिनों में बाहर का खाना खासकर स्ट्रीट फूड खाने से अवश्य बचें।
बाहर के खाने के बजाय घर का बना ताजा खाना खाएं। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि खाना हल्का अर्थात जल्दी पचने वाला हो, उसमें तेल-मसाले का प्रयोग कम किया गया हो।

बनाएं दूरी
बहुत अधिक मात्रा में चाय या काफी का सेवन न करें।
विभिन्न प्रकार के कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम से कम करें।
डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।
अधिक तैलीय भोजन का सेवन न करें।

पेट की गर्मी बढ़ने के कारण
मसालेदार और अधिक तैलीय भोजन का सेवन, इससे पेट में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है।
खानपान में अनियमितता, समय से भोजन न करना, अधिक मात्रा में खा लेना, भोजन का बिल्कुल सेवन न करना, देर रात भोजन करना, इससे पाचनतंत्र प्रभावित होता है।
शरीर में पानी की कमी, कम मात्रा में पानी पीने से पाचनक्रिया खराब होती है और एसिडिटी की मात्रा भी बढ़ जाती है।
शरीर में अधिक कैफीन का पहुंचना, इससे पेट की अंदरूनी परत में जलन होने लगती है।
तनाव और चिंता, इनसे भी शरीर में एसिड का उत्पादन अधिक मात्रा में होने लगता है। इससे पेट की गर्मी बढ़ जाती है।
नींद की कमी, अपर्याप्त नींद न केवल पाचनक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि पेट के अंदर की गर्मी को भी बढ़ा देती है।

डॉक्टर से मिलें, अगर
अगर घरेलू उपायों से पेट संबंधी समस्याओं में आराम न मिले।
पेट में जलन लगातार बनी रहे और दर्द भी हो।
बार-बार उल्टी या दस्त हों।
वजन में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा हो।

घरेलू उपाय हैं बहुत लाभकारी
वैद्य अच्युत कुमार त्रिपाठी (सदस्य एवं गुरु राष्ट्रीय आर्युवेद विद्यापीठ) के मुताबिक इस मौसम में जिस प्रकार से प्रकृति में जलीय तत्वों की कमी हो जाती है, ठीक उसी प्रकार से शरीर में। गर्मी में वात, पित्त में असंतुलन हो जाने के कारण उदर संबंधी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है कि हम कुछ घरेलू उपायों पर अमल करें।

इसके लिए रात में थोड़ी सूखी धनिया, कच्चा जीरा और सौंफ को रात में भिगो दें। सुबह इन तीनों को पीस लें। इस मिश्रण से एक चम्मच मात्रा लेकर एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। आप इसमें ग्लूकोज भी मिला सकते हैं।
इस मिश्रण को फ्रिज में स्टोर कर सकते हैं। कच्ची या भुनी हुई सौंफ में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर खाने से भी आराम मिलता है।
इसी तरह छाछ के साथ सेंधा नमक, भुना पिसा जीरा मिलाकर पीने से भी राहत मिलती है। इनसे भूख भी बढ़ती है।
इस मौसम में बेल का मुरब्बा और बेल का शर्बत पीने से भी काफी आराम मिलता है। बेल का पाउडर भी खाया जा सकता है।
आजवाइन, जीरा, कलौंजी और एक या दो ग्राम हींग, छोटी हर्र देसी घी में पकाकर पीस लें। इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला सकते हैं। खाना खाने के बाद इसे खा सकते हैं।
रात में बीज निकालकर मुनक्का को पानी में भिगो दें, सुबह इसे खा सकते हैं। रात में त्रिफला चूर्ण भी खा सकते हैं। इसे पानी या दूध किसी के साथ ले सकते हैं।
25 दाने किशमिश, दो अंजीर, पांच टुकड़े अखरोट, पांच बादाम रात में भिगो दें और सुबह नाश्ते पहले इन्हें अच्छी तरह चबाकर खाएं। इसके साथ एक कप दूध ले लें। इससे उदर रोगों के साथ ही कोलेस्ट्राल और ब्लड प्रेशर संबंधी समस्याओं से भी राहत मिलती है साथ ही शरीर को पोषण।
इन्हें स्टील, कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में ही भिगोएं। इसके साथ ही तरबूज और खरबूजा का सेवन अवश्य करें। बस, इन्हें खाने के बाद थोड़ी देर तक पानी बिल्कुल न पिएं।
आम का पना, गन्ने का रस भी बहुत लाभदायक होता है। हर मौसम में पाए जाने वाले फल, उस ऋतु में होने वाली समस्याओं से राहत दिलाते हैं।

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