पीएम मोदी की स्वीडन यात्रा: AI, नए रोजगार और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर में ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ में हिस्सा लिया। इसके साथ ही,उनके पांच देशों के दौरे का एक अहम पड़ाव भी पूरा हो गया, जिसमें इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात और नीदरलैंड्स की उच्च-स्तरीय यात्राएं शामिल थीं।

गोथेनबर्ग शहर में 17 मई को आयोजित हुआ यह कार्यक्रम, जिसकी सह-मेजबानी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की थी।

कूटनीति और व्यापार के क्षेत्र में भारत-यूरोप के हालिया सबसे प्रमुख कार्यक्रमों में से एक रहा। X पर एक पोस्ट में, PM मोदी ने कहा कि व्यापार जगत के नेताओं के साथ हुई चर्चाओं का मुख्य जोर भारत-स्वीडन के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर था, विशेष रूप से भविष्य की प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान और विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे उभरते क्षेत्रों में।

भारत-स्वीडन संबंधों को मिलेगी गति: पीएम मोदी  

उन्होंने यूरोपीय कंपनियों को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, AI, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डीप-टेक मैन्युफैक्चरिंग और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग करने के लिए भी आमंत्रित किया।

X पर एक पोस्ट में, PM मोदी ने कहा, “इन परिणामों से भारत-स्वीडन संबंधों को नई ऊर्जा और गति मिलेगी। मुझे विश्वास है कि भारत-स्वीडन साझेदारी एक अधिक समृद्ध और भविष्य में दुनिया के निर्माण में सार्थक योगदान देगी।” इसके साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पर एक पोस्ट में PM मोदी की स्वीडन यात्रा के मुख्य परिणामों को बताने का काम किया।

स्वीडन यात्रा की मुख्य बातें

1. भारत-स्वीडन संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा मिला:

भारत और स्वीडन ने 2026–2030 के लिए एक ‘संयुक्त वक्तव्य’ और ‘संयुक्त कार्य योजना’ को अपनाया, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचा दिया गया। इस रूपरेखा का उद्देश्य आर्थिक और सुरक्षा संबंधी लचीलेपन को मजबूत करना है, साथ ही रणनीतिक संवाद, अगली पीढ़ी के आर्थिक संबंधों, उभरती प्रौद्योगिकियों, विश्वसनीय कनेक्टिविटी, स्थिरता और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना है।

2. ‘भारत-स्वीडन संयुक्त नवाचार साझेदारी 2.0’ की शुरुआत:

इस पहल में एक वर्चुअल ‘भारत-स्वीडन संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र’ स्थापित करने की योजनाएं शामिल हैं। इसका लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6G, क्वांटम कंप्यूटिंग, सतत खनन, महत्वपूर्ण खनिजों, अंतरिक्ष और जीवन विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करना है।

3. ‘भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर’ को मंजूरी:

दोनों पक्षों ने ‘भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर’ (SITAC) के संयुक्त विकास को मंजूरी दी। इस पहल का उद्देश्य AI, डिजिटल परिवर्तन और उन्नत प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है, साथ ही उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच मज़बूत साझेदारियों को प्रोत्साहित करना है।

4. पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने का लक्ष्य:

भारत और स्वीडन अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए हैं। इस कदम से व्यावसायिक विकास को बढ़ावा मिलने, व्यापार को आसान बनाने और ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत भारत की विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) संबंधी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

5. रोजगार बढ़ाने के लिए SME और स्टार्टअप प्लेटफॉर्म:

दोनों देश उद्यमिता, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए, विशेष रूप से युवाओं के बीच, एक ‘भारत-स्वीडन SME और स्टार्टअप प्लेटफॉर्म’ विकसित करेंगे।

6. ‘टैगोर-स्वीडन’ व्याख्यान श्रृंखला की घोषणा:

‘टैगोर-स्वीडन’ व्याख्यान श्रृंखला को ‘विकास भी, विरासत भी’ विषय के तहत शुरू किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक, बौद्धिक और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करना है।

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